Wednesday, January 30, 2008

Cabinet Okays Proposals

Cabinet Okays Proposals for Patna Beautification




The state Cabinet on Wednesday passed the proposal to build the Buddha Memorial Park on the lot where once Bankipore Jail stood and beautify the Children's Park in Sri Krishna Puri area while also giving a go-ahead signal to rid the state capital of its nagging drinking water problem at the cost of Rs. 11 crore.The Children's Park beautification scheme is expected to cost the state exchequer Rs. 79 lakh and will be completed in two months, officials said.Invitation to submit bid for the park project will be made through a tender to be published on February 9.The Buddha Park, the so-called dream project of Chief Minister Nitish Kumar, will occupy nearly 20 acres of land facing Patna Junction and would sport a theme of, as the name suggests, Lord Buddha including a 40 feet tall statue of the Enlightened One.The government has decided to finance the Rs. 11 crore drinking water project by taking advance from the state emergency fund, officials said.

CBI Inspector Arrested

CBI Inspector Arrested while Taking Bribe



CBI sleuths from Delhi on Tuesday nabbed a member of their own fraternity when they caught Praveen Kumar, a CBI inspector based in Patna, while taking Rs. 50,000 in bribe from the manager of United Commercial Bank, Giddhaur branch, H. S. Thakur.According to the report, Thakur had notified the CBI Delhi about Kumar's repeated attempt to extort Rs. 50,000 from the bank on one pretext or other.On Tuesday, a team of CBI officials set up a trap and lured Kumar to come to a hotel on Frazer Road. After waiting for nearly five hours, Kumar arrived at the hotel on a scooter at around 9:00 pm and accepted Rs. 50,000 in cash from Thakur.As soon as the money exchanged hands, officials from Delhi jumped into action and arrested Kumar with cash still in his hand.Officials continue to interrogate Kumar who, they said, may have been involved in many other bribery cases in the state.

Clean Chit

हरभजन पर आरोप हटाने का स्वागत

हरभजन लगातार कहते आ रहे थे कि उन्होंने कोई नस्लवादी टिप्पणी नहीं की
हरभजन सिंह पर नस्लवादी टिप्पणी के आरोप हटाने पर भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने राहत की सांस ली है और फ़ैसले का स्वागत किया है.
बीसीसीआई के अध्यक्ष शरद पवार ने ख़ुशी जताते हुए कहा, " जज ने सही फ़ैसला सुनाया है और बीसीसीआई शुरु से कह रहा था कि हरभजन के ख़िलाफ़ नस्लवादी टिप्पणी का आरोप लगाना बोर्ड को स्वीकार नहीं है."
बीसीसीआई अध्यक्ष शरद पवार ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद के अपील कमिश्नर जॉन हेंसन ने सही फ़ैसला सुनाया है.
जज ने सही फ़ैसला सुनाया है और बीसीसीआई शुरु से कह रहा था कि हरभजन के ख़िलाफ़ नस्लवादी टिप्पणी का आरोप लगाना बोर्ड को स्वीकार नहीं है
शरद पवार, बीसीसीआई अध्यक्ष
बीसीसीआई की ओर से हरभजन की पैरवी के लिए नियुक्त वीआर मनोहर के अनुसार हरभजन के ख़िलाफ़ गाली देने का आरोप लगा और नियमों के अनुसार उन्हें आधी मैच फ़ीस का जुर्माना भरना होगा.
इसके पहले बीसीसीआई के उपाध्यक्ष ललित मोदी ने सुनवाई से पहले मुबंई में कहा था, ''यदि हरभजन के ख़िलाफ़ नस्लवादी टिप्पणी का आरोप वापस नहीं लिया गया तो भारतीय टीम त्रिकोणीय वनडे सिरीज़ से हट सकती है.''
ग़ौरतलब है कि ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी एंड्रयू साइमंड्स पर कथित नस्लवादी टिप्पणी करने के मामले में हरभजन सिंह पर तीन टेस्ट मैचों के लिए लगा प्रतिबंध हटा लिया गया है लेकिन उन्हें मैच की आधी फ़ीस का जुर्माना भरना होगा.
इस घटना के बाद मैच रेफ़री माइक प्रॉक्टर ने हरभजन पर तीन मैचों का प्रतिबंध लगा दिया था.

'मैदान की बात मैदान पर'
फ़ैसले के बाद भारतीय टीम के मैनेजर चेतन चौहान का कहना था कि मैदान की बातें मैदान में ही छोड़ देनी चाहिए.
मलय नीरव से बातचीत में चेतन चौहान ने कहा कि मैदान के अंदर की बातें तभी बाहर आनी चाहिए जब बात हाथ से निकल जाए और झगड़ा या हाथापाई हो जाए.
मैदान पर थोड़ी टीका टिप्पणी और गर्मागर्मी गंभीर बात नहीं है जब तक कि मामला टकराव तक न पहुँच जाए चेतन चौहान, भारतीय टीम के मैनेजर
कहना था कि मैदान पर थोड़ी टीका टिप्पणी और गर्मागर्मी गंभीर बात नहीं है बशर्ते मामला टकराव तक न पहुँच जाए.
चेतन चौहान का मानना है कि कोई भी खेल अब 'जेंटलमैन गेम' नहीं रह गया है, ज्यादातर सभी खेल पेशेवर हो गए हैं. इन पर खिलाड़ियों की जीविका निर्भर है इसलिए खिलाड़ी तरह तरह के हथकंडे अपनाते हैं.
उसका मानना है कि भारतीय टीम को पिछली बातों को भुला कर अब खेल पर ध्यान देना चाहिए.
'नहीं रहा वो खेल'
पूर्व क्रिकेटर मदनलाल का भी मानना है कि क्रिकेट अब 'जेंटलमैन गेम' नहीं रहा है क्योंकि अब हर टीम किसी भी तरह जीतना चाहती है.
हरभजन पर से पाबंदी हटाने पर खुशी मनाते लोग
मदनलाल का कहना था कि यदि ये मामला नहीं सुलझता तो अंतरराष्ट्रीय खेल परिषद के लिए मुश्किल हो जाती.
उनका मानना था कि ये मामला मैदान पर ही सुलझा लिया जाना चाहिए था.
पूर्व क्रिकेटर सैयद किरमानी का कहना है कि हरभजन पर 50 फ़ीसदी मैच फीस का जुर्माना और ब्रै़ड हॉग को बरी करना, उनकी समझ के परे है.
किरमानी भी मानते हैं कि अब क्रिकेट 'जेंटलमैन गेम' नहीं रहा.
उनका कहना था कि क्रिकेटर जब कचहरी में खड़े नज़र आएँ तो उससे इस बात का अंदाज़ा लगाया जा सकता है.
वो कहते हैं कि विवाद इतना तूल नहीं पकड़ना चाहिए था, ग़लतियाँ किसी से भी हो सकती है, उसको स्वीकार करना चाहिए.

Tuesday, January 29, 2008

AHINSA DIWAS

गांधी जयंती अहिंसा दिवस के रूप में

संयुक्त राष्ट्र में भी गांधी को याद किया जा रहा है
महात्मा गांधी का जन्म दिन दो अक्तूबर पहली बार विश्व अहिंसा दिवस के रूप में मनाया जा रहा है.
संयुक्त राष्ट्र ने इसी साल एक प्रस्ताव पारित करके दो अक्टूबर को विश्व अहिंसा दिवस के रूप में मनाने का फ़ैसला किया था.
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करने वाली हैं.
दुनिया भर में महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि देने के लिए आयोजन किए गए हैं.
श्रद्धांजलि
इस बीच दिल्ली में महात्मा गांधी की राजघाट स्थित समाधि पर देश के नेताओं ने पुष्प अर्पित करके श्रद्धांजलि दी है.
इसमें राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल, प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी सहित कई बड़े नेता शामिल हैं.
प्रधानमंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह ने कांग्रेस मुख्यालय से महात्मा गांधी के समाधि स्थल राजघाट तक जाने वाली एक रैली को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया है.
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी न्यूयॉर्क में हैं.
वे संयुक्त राष्ट्र में महात्मा गाँधी की जयंती पर आयोजित विशेष सभा को संबोधित करेंगी

अहिंसा दिवस

अहिंसा की नीति के ज़रिए विश्व भर में शांति के संदेश को बढ़ावा देने के महात्मा गांधी के योगदान को सराहने के लिए इस दिन को अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस के रूप में मनाने का फ़ैसला किया गया था.
इस सिलसिले में संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारत के रखे गए प्रस्ताव को व्यापक समर्थन मिला था.
महासभा के कुल 191 सदस्य देशों में से 140 से भी ज़्यादा देशों ने इस प्रस्ताव को सह-प्रायोजित किया था.
इनमें अफ़गानिस्तान, नेपाल, श्रीलंका, बांग्लादेश, भूटान जैसे भारत के पड़ोसी देशों के अलावा अफ़्रीका और अमरीका महाद्वीप के कई देश शामिल थे.
मौजूदा विश्व व्यवस्था में अहिंसा की सार्थकता को मानते हुए बिना मतदान के ही सर्वसम्मति से इस प्रस्ताव को पारित कर दिया गया था.

गांधी जयंती अहिंसा दिवस के रूप में

संयुक्त राष्ट्र में भी गांधी को याद किया जा रहा है
महात्मा गांधी का जन्म दिन दो अक्तूबर पहली बार विश्व अहिंसा दिवस के रूप में मनाया जा रहा है.
संयुक्त राष्ट्र ने इसी साल एक प्रस्ताव पारित करके दो अक्टूबर को विश्व अहिंसा दिवस के रूप में मनाने का फ़ैसला किया था.
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करने वाली हैं.
दुनिया भर में महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि देने के लिए आयोजन किए गए हैं.

श्रद्धांजलि

इस बीच दिल्ली में महात्मा गांधी की राजघाट स्थित समाधि पर देश के नेताओं ने पुष्प अर्पित करके श्रद्धांजलि दी है.
इसमें राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल, प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी सहित कई बड़े नेता शामिल हैं.
प्रधानमंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह ने कांग्रेस मुख्यालय से महात्मा गांधी के समाधि स्थल राजघाट तक जाने वाली एक रैली को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया है.
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी न्यूयॉर्क में हैं.
वे संयुक्त राष्ट्र में महात्मा गाँधी की जयंती पर आयोजित विशेष सभा को संबोधित करेंगी.
अहिंसा दिवस
अहिंसा की नीति के ज़रिए विश्व भर में शांति के संदेश को बढ़ावा देने के महात्मा गांधी के योगदान को सराहने के लिए इस दिन को अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस के रूप में मनाने का फ़ैसला किया गया था.
इस सिलसिले में संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारत के रखे गए प्रस्ताव को व्यापक समर्थन मिला था.
महासभा के कुल 191 सदस्य देशों में से 140 से भी ज़्यादा देशों ने इस प्रस्ताव को सह-प्रायोजित किया था.
इनमें अफ़गानिस्तान, नेपाल, श्रीलंका, बांग्लादेश, भूटान जैसे भारत के पड़ोसी देशों के अलावा अफ़्रीका और अमरीका महाद्वीप के कई देश शामिल थे.
मौजूदा विश्व व्यवस्था में अहिंसा की सार्थकता को मानते हुए बिना मतदान के ही सर्वसम्मति से इस प्रस्ताव को पारित कर दिया गया था.

LAST WORD OF MAHATMA GANDHI

क्या थे महात्मा गांधी के अंतिम शब्द!


महात्मा के विचारों को आज भी प्रासंगिक माना जाता है
साठ साल पहले 30 जनवरी, 1948 के ही दिन दिल्ली के बिड़ला भवन में नाथूराम गोडसे महात्मा गाँधी के पैर छूने के लिए

झुका.... और जब उठा तो उसने एक के बाद एक तीन गोलियाँ महात्मा के सीने में दाग़ दीं थीं.
अब तक माना जाता है कि गोली लगने के बाद बापू 'हे राम!' कहते हुए गिरे थे और यह शब्द उनके पास चल रही उनकी पोती आभा ने सुने थे.
लेकिन एक नई पुस्तक 'महात्मा गांधी: ब्रह्मचर्य के प्रयोग' में बापू के अंतिम शब्द ‘हे राम’ पर सवाल उठाया गया है.
पत्रकार दयाशंकर शुक्ल सागर की पुस्तक में दावा किया है कि 30 जनवरी, 1948 को गोली लगने के बाद महात्मा गांधी के मुख से निकलने वाले अंतिम शब्द ‘हे राम’ नहीं थे.
पुस्तक के अनुसार 30 जनवरी, 1948 को जब नाथूराम गोडसे ने महात्मा गांधी को गोली मारी थी तो बापू के सबसे क़रीब उनकी पौत्र वधु मनु गांधी थीं.
उन्होंने बापू के होठों से अंतिम शब्द ‘हे रा...’ सुनाई दिया था इसलिए मान लिया गया कि उनके अंतिम शब्द ‘हे राम’ थे.
नई पुस्तक में कहा गया है कि मनु के दिमाग में ये शब्द इसलिए आए क्योंकि उनके अवचेतन मन में नोआखली में महात्मा गांधी की कही हुई यह बात गूंज रही थी कि '' यदि मैं रोग से मरूँ तो मान लेना कि मै इस पृथ्वी पर दंभी और रावण जैसा राक्षस था. मैं राम नाम रटते हुए जाऊं तो ही मुझे सच्चा ब्रह्मचारी, सच्चा महात्मा मानना.''

अलग-अलग राय

किताब के अनुसार महात्मा गांधी के निजी सचिव प्यारेलाल का भी मानना था कि गांधीजी ने मूर्छित होते समय जो शब्द निकले थे वे 'हे राम' नहीं थे.
उनका कहना था कि महात्मा गांधी के अंतिम शब्द 'राम राम' थे. ये कोई आह्वान नहीं था बल्कि सामान्य नाम स्मरण था.
समाचार एजेंसी भाषा से बातचीत में जानी-मानी गांधीवादी निर्मला देशपांडे ने इस बात से असहमति जताई है.
निर्मला गांधी का कहना था कि उस शाम बापू जब बिड़ला मंदिर में प्रार्थना के लिए जा रहे थे तब उनके दोनों ओर आभा और मनु थीं. आभा बापू की पौत्री और मनु उनकी पौत्रवधु थीं.
निर्मला गांधी का कहना है कि जब बापू को गोली लगी थी तब उनके हाथ आभा और मनु के कंधों पर थे.
गोली लगने के बाद वे आभा की ओर गिरे थे. आभा ने स्पष्ट सुना था कि बापू के मुंह से आख़िरी बार ‘हे राम’ ही निकला था.

MAHATMA GANDHI

आज विसर्जित होंगी बापू की अस्थिया

महात्मा की अस्थियों को एक व्यापारी ने मणिभवन ट्रस्ट को सौंपा था
भारत के राष्ट्रपिता कहे जाने वाले महात्मा गाँधी की अस्थियों का एक कलश बुधवार को उनकी 60वीं पुण्यतिथि पर विसर्जित किया जाएगा.
विसर्जन का काम मुंबई में किया जाएगा. बापू की इन अस्थियों को अरब सागर में प्रवाहित किया जाना है.
महात्मा गांधी की 60 वर्ष पहले 30 जनवरी, 1948 को दिल्ली में हत्या कर दी गई थी जिसके बाद उनकी अस्थियों को देश के अलग-अलग हिस्सों में विसर्जित भी कर दिया गया था.
पर पिछले दिनों एक व्यापारी परिवार ने मुंबई स्थित मणिभवन को एक कलश देते हुए बताया कि इसमें महात्मा गांधी की अस्थियाँ हैं और यह कलश वर्ष 1948 से ही उनके पास रखा हुआ
है.


'विसर्जन ही उचित'

मणिभवन ट्रस्ट की मंशा थी कि इस कलश को लोगों के दर्शन के लिए बापू की एक संग्रहणीय सामग्री के तौर पर सुरक्षित रखा जाए पर बापू के परिजन इससे सहमत नहीं है.
महात्मा गांधी के परिवार की चार पीढ़ियों के सदस्यों का तर्क है कि बापू नहीं चाहते थे कि उनकी अस्थियों को रखा जाए. वो चाहते थे इन्हें विसर्जित कर दिया जाए.
परिवार का कहना है कि धर्म के मुताबिक भी यही सही होगा कि उन्हें विसर्जित कर दें.
पिछले कुछ दिनों से यह अस्थिकलश मणिभवन में लोगों के दर्शन के लिए रखा था. इस दौरान बड़ी तादाद में लोग बापू के अवशेषों को देखने आए.
माना जा रहा है कि यह अस्थिकलश बापू का अंतिम बचा अवशेष होगा.
बुधवार को विसर्जन के दौरान महात्मा गांधी के परिवार के कई सदस्य, राज्य सरकार के कई वरिष्ठ अधिकारी, कई गांधीवादी और आम लोग इकट्ठा हो रहे हैं.

PATNA JUNCTION

मैं कई वर्षों से देख रहा हूँ कि पटना रेलवे स्टेशन पर पागल औरतों की संख्या दिन- प्रतिदिन बढ़ती ही जा रही है. इतने पर ही बात रुक जाती तो कोई बात नहीं थी पर चिंता की बात यह है कि उस पागल औरत के साथ कुछ ऐसा हो रहा है कि कुछ महीनों के बाद उसके गोद में बच्चा दिखने लगता है.
अब उसकी स्थिति बहुत भयावह हो जाता है. वह नवजात शिशु बिना दूध - पानी के कैसे देश का भविष्य बनेगा हम सोच सकते है.
सरकार की योजना गर्भ से ही शुरू हो जाता है. वह योजना इन बच्चों तक कोई पहुँचने में समर्थ नहीं हो पा रहा है. सरकार हो या एन.जी.ओ.
सबसे दीगर बात है कि स्टेशन प्रबंधक, जी.आर.पी., आर. पी. एफ. इन सारे में से किसी को यह बात महत्वपूर्ण नहीं लगती.
प्रेस वालों की भी नजर अब तक इस पर नहीं गई है. जब की उनकी नजर इस पर तुरंत जानी चाहिए. वे नहीं देखेंगे तो शायद उन पर किन्ही की नजर या ध्यान नहीं ही जायेगा. इसलिए मैं प्रेस वाले भाइयों से अनुरोध करूँगा कि वे इनकी खबर सुर्खियों में छापें.